उनसे नज़रें मिल जाएं बस
मुड़ मुड़ कर देखा किये उन्हें राह भर
मगर दिल की उलझन भी अजीब है
वो नज़रें मिलाएं तो आफत न मिलाएं तो आफत
उनसे मिलने के आरज़ू में
जगा किये हम रात भर
मगर दिल की उलझन भी अजीब है
वो आएं तो आफत न आएं तो आफत
तीर-ए-इश्क़ ने ऐसा ज़ख्म दिया हमें
के सांसें थम जाए उनकी हर बात पर
मगर दिल की उलझन भी अजीब है
वो मुस्कुराएं तो आफत और दिल जलाये तो आफत
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