Wednesday, September 1, 2010

उम्मीद (Ummeed - Hope)


सुबह की किरणों ने फिर एक नया उमंग है जगाया
आसमा को छूने का नया सपना है दिखाया


उड़ने के लिए मैंने भी पंख हैं फैलाये
पर कड़ी धुप को देख मेरी उम्मीदें डगमगाए


गुमसुम चुपचाप सा मैं कोसने लगा किस्मत को
क्यूँ आज ही तपना था इस सूरज को


ध्यान मेरा एक पंची ने मोड़ा
मेरे भ्रम को उस नन्हे से जीव ने तोडा


कड़कती धुप में भी वोह चह्चहा रहा था
मानो सूरज को अपने गीत सुना रहा था


हिम्मत उसकी देख मैं मुस्काया
और मेरी समझ में यह आया
के बिना हौसले के किसी ने कुछ भी नहीं है पाया.

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The morning Sun rays filled my heart with a new hope
It gave me a new dream to reach for the skies

I stretched my wings to fly
But the heat from the Sun jaded my spirits

Silently I blamed my fate
Why the Sun had to beat down like this when I had to take off

A bird attracted my attention
And it broke my fallacy

In the heat of the Sun the bird was singing
As if it was singing in the praise of the Sun

I smiled at his courage
And I understood
That without courage and hope no one has ever gained anything.